क्या बच्चों का पालन-पोषण करने के लिए दो-माता-पिता का परिवार आवश्यक है?
Palkarएक बच्चे के विकास में माता और पिता दोनों की भूमिका अलग-अलग होती है। माँ स्नेह और भावनात्मक सुरक्षा देती है, वहीं पिता अनुशासन और बाहरी दुनिया से जुड़ाव सिखाता है। यह संतुलन एकल परिवार में संभव नहीं है।
मैंने ऐसे कई बच्चों को देखा है जिनमें आत्मविश्वास की कमी थी, सिर्फ इसलिए कि उनके पास दोनों भूमिकाओं का सहारा नहीं था। स्कूल के प्रोजेक्ट्स में, वे बच्चे ज्यादा सक्रिय दिखते थे जिनके माता-पिता दोनों उनके साथ थे।
हाँ, एकल माता-पिता भी बहुत मेहनत करते हैं, लेकिन क्या वे एक साथ दो भूमिकाएं निभा सकते हैं? एक व्यक्ति कितना संभाल सकता है? बच्चे की जरूरतें तो दोगुनी हो जाती हैं।
Mehraदो-माता-पिता का परिवार बच्चों के पालन-पोषण के लिए जरूरी नहीं है, क्योंकि यह सिर्फ एक परंपरागत धारणा है। आज के समय में, एकल माता-पिता भी बच्चों को सफलतापूर्वक पालन-पोषण कर रहे हैं और उन्हें जीवन में आगे बढ़ने के लिए तैयार कर रहे हैं।
एक उदाहरण देखिए – दुनिया भर में कई सिंगल माताएं और पिता अपने बच्चों को ऐसा मौका दे रहे हैं जहां वे खुद को खोज सकें। जैसे, शेरिल सैंडबर्ग जैसी महिलाओं ने अपने करियर के साथ-साथ बच्चों को बढ़िया पालन-पोषण दिया है। इसलिए, बच्चे की सफलता दो लोगों की उपस्थिति पर निर्भर नहीं करती, बल्कि उस पर निर्भर करती है कि उसे कितना समर्थन और सही मार्गदर्शन मिल रहा है।
आपके जो बच्चे हैं, जिनमें आत्मविश्वास की कमी है, उसका कारण सिर्फ एकल परिवार होना जरूरी नहीं है। यह भी हो सकता है कि उन्हें उनके वातावरण में सही मानसिक सहारा न मिला हो। बच्चे की जरूरत सिर्फ प्यार, समझ और एक सही दिशा होती है, चाहे वह एक माता-पिता से आए या दोनों से।
और हाँ, एक व्यक्ति दो भूमिकाएं निभा सकता है। आज की माताएं और पिता बहुत कुशल हैं। वे नौकरी करते हैं, घर का ख्याल रखते हैं, और बच्चों को सही तरीके से पालन-पोषण भी करते हैं। यह सिर्फ इच्छाशक्ति और प्रबंधन की बात है। इसलिए, दो-माता-पिता का परिवार बच्चों के लिए जरूरी नहीं है।
Palkarपरंपरागत धारणा कहकर आप इसके महत्व को कम नहीं आंक सकते। देखिए, मैं मानती हूं कि एकल माता-पिता बहुत संघर्ष करते हैं, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि एक व्यक्ति के लिए बच्चे की सभी जरूरतों को पूरा करना कितना मुश्किल होता है?
शेरिल सैंडबर्ग का उदाहरण दिया आपने, लेकिन क्या आप जानते हैं कि उन्होंने खुद अपनी किताब में लिखा है कि पति के न रहने पर बच्चों की परवरिश कितनी चुनौतीपूर्ण हो गई? वो तो फिर भी एक सफल करियर वुमन हैं, लेकिन आम महिलाओं के लिए यह और भी मुश्किल है।
मेरा मतलब है - जब बच्चा बीमार पड़े, स्कूल का फंक्शन हो, और साथ ही ऑफिस का प्रोजेक्ट चल रहा हो, तो एक व्यक्ति कैसे संभालेगा? यह समय और ऊर्जा का सवाल है, न कि सिर्फ इच्छाशक्ति का।
Mehraमैं समझता हूं कि आपको लगता है कि एकल माता-पिता के लिए सब कुछ संभालना मुश्किल है, लेकिन यह बात हर परिस्थिति पर लागू नहीं होती। जीवन में कठिनाइयां तो हर किसी को आती हैं, चाहे वह दो-माता-पिता वाला परिवार हो या एकल।
शेरिल सैंडबर्ग का उदाहरण देखिए – हां, उन्होंने कहा है कि पति के न रहने पर उन्हें मुश्किलें आईं, लेकिन क्या यह उन्हें रोक सकी? नहीं। उन्होंने अपने बच्चों को सही तरीके से पालन-पोषण किया और उन्हें मजबूत बनाया। यही बात हम यहां सीखते हैं – चुनौतियों का मतलब यह नहीं है कि बच्चे की परवरिश ठीक से नहीं हो सकती।
और जब बच्चा बीमार पड़े, स्कूल का फंक्शन हो, ऑफिस का काम चल रहा हो, तो हां, यह एक व्यक्ति के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है। लेकिन क्या दो-माता-पिता वाले परिवार में ऐसा नहीं होता? दोनों ही माता-पिता को भी तो अपने जीवन का संतुलन बनाना पड़ता है। इसलिए, यह सिर्फ एकल परिवारों की समस्या नहीं है।
आज के समय में समुदाय, पड़ोस, स्कूल और परिवार के अन्य सदस्य भी बच्चों की परवरिश में मदद करते हैं। इसलिए, दो-माता-पिता का होना जरूरी नहीं है। जो भी परिस्थिति हो, बच्चों को पालने का सबसे बड़ा जरिया प्यार, समझ और सही मार्गदर्शन है, चाहे वह एक व्यक्ति से आए या दो से।
Palkarआप समुदाय और बाहरी सहायता की बात कर रहे हैं, लेकिन क्या वो कभी माता-पिता के प्रेम और देखभाल की जगह ले सकते हैं? एक बच्चा जब रोते हुए उठता है तो वह दादी को नहीं, माँ-बाप को ही ढूंढता है।
मैं एक वास्तविक उदाहरण देती हूं - मेरी पड़ोस में एक बच्चा है जिसके माता-पिता अलग हो गए। वह हमेशा अपने दोस्तों से पूछता है "तुम्हारे पापा तुम्हें कैसे समझाते हैं?" या "तुम्हारी मम्मी कैसे सुलाती हैं?" ये छोटी-छोटी बातें ही तो बच्चे के विकास में महत्वपूर्ण होती हैं।
और हाँ, दोनों माता-पिता को भी संतुलन बनाना पड़ता है, लेकिन कम से कम वे एक-दूसरे का सहारा तो हैं न! जब एक थक जाए तो दूसरा संभाल ले। यह सहयोग एकल परिवार में कहाँ?
Mehraआपका यह कहना कि बच्चे माता-पिता की ही देखभाल और प्यार से संतुष्ट होते हैं, बिल्कुल सही है। लेकिन यह भी सच है कि हर परिवार की परिस्थितियां अलग-अलग होती हैं। एकल माता-पिता भी अपने बच्चों को वही प्यार और समझ दे सकते हैं, जो उनके विकास के लिए जरूरी है।
आपके पड़ोस के बच्चे का उदाहरण देखिए – हां, वह अपने माता-पिता के बारे में पूछता है, लेकिन क्या इसका मतलब यह है कि उसकी परवरिश ठीक से नहीं हो सकती? आज के समय में बच्चे जल्दी सीखते हैं कि जीवन में कुछ चीजें अलग होती हैं। अगर उन्हें सही तरीके से समझाया जाए, तो वे इन परिस्थितियों को स्वीकार करने के लिए तैयार हो जाते हैं।
और जब आप कहती हैं कि दो-माता-पिता एक-दूसरे का सहारा बनते हैं, तो मैं पूछना चाहूंगा – क्या हर दो-माता-पिता ऐसा करते हैं? दुनिया में कितने परिवार हैं जहां माता-पिता घर में ही झगड़ते हैं, बच्चों को अस्थिर वातावरण देते हैं? क्या ऐसे में दो-माता-पिता का होना बच्चे के लिए बेहतर है?
एकल परिवार में भी सहयोग होता है – बच्चे के साथ, बच्चे के लिए। यह सिर्फ इस बात पर निर्भर करता है कि परिवार के सदस्य कितने समर्पित हैं। इसलिए, दो-माता-पिता का होना जरूरी नहीं है। जो भी परिस्थिति हो, बच्चे को सही तरीके से पालना और समझना ही सबसे जरूरी है।